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Showing posts from September 7, 2020

चुभन

उसके द्वारा कहे गए शब्दों की चुभन ऐसी थी कि ,                आज भी उसकी   चुभन है  नश्तर की तरह .                  दर्द होता है दिल में रह रह कर मेरे,                                    जिंदगी तो मैं जी रही हूं पलस्तर की तरह.  

मैं तो जा रही थी

  मैं तो जा रही थी कल कल करती हुई,                             हंसते और मुस्कुराते इठलाती हुई अपनी राह पर,                मैं तो जा रही थी अपने मुकद्दर समुंदर से मिलने,                जाने कौन आया मेरा रुख मोड़ कर चला गया.

कोरा कागज

  दिल तो था मेरा कोरा कागज सा,                                    कोई आया और इसे रंगीन कर गया.                                मैं खुश थी वह फिर से आया और,                                   फाड़ कर इस कागज को चला गया.

आंसुओं की नदी

  अपने ही बहाते हैं हमारी आंखों से  आंसुओं की नदी,          अपनी ही करते हैं हमारी भावनाओं को तार तार.               अपने हैं हमें डुबो देते हैं भावनाओं के समुंदर में.                  दूसरे तो केवल आते हैं और नहा कर चले जाते हैं.