संदेह सा होने लगा है.
दलाल भरे पड़े हैं सीधे-साधे की बस्ती में, हम डूबने से लगे हैं आपने ही बनाई कश्ती में. जगह-जगह चोर है और लूटने वाले हमें, अब संदेशा होने लगा है अपनी बनाई हस्ती में.