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Showing posts from November 1, 2020

मेरी वफा

  बेवफाओं की भीड़ में हम वफा का पिटारा लेकर बैठे हैं.    इस पिटारे में भरी है वफाएं ही वफाएं मेरी अब तक की.        लोग आते हैं पिटारे को देखते हैं कुछ फुल बातें हैं इसे ,      कुछ लोग अनजान बनकर पैर रख कर चले जाते हैं .            बेवफाई का जमाना है हर जगह बेवफाई है भरी हुई .           वफा की हालत ऐसी है कि यह बाजार में नंगी खड़ी हुई.   दाम अब बाजार में बेवफाई का है यारों करो जितनी .          मेरी वफा तो बाजार में बिना दाम है पूरी बिक गई.  कभी हमें गुरूर था बहुत मगरूर थे हम अपने आप में,        झूमते रहते थे हवा की तरह कि हमसे अच्छा नहीं है कोई.     जब पैर निकाले हमने अपनी इस वफा को ले बाजार में,     सच  कहूं! मेरी वफा की कीमत किसी ने ना लगाई. हर सामान बिकता है बाजार में कीमत सभी की होती है.      मिट्टी बेचने जाओ बाजार में करोड़ों में भी बिक जाती है.     हम...

तनहाई

 जब कभी हम तन्हाई में होते हैं,                                      उनकी यादों को दिल से लगाए हुए,                                    हजारों ख्वाबों को अपने साथ लिए,                                 रात भर हम उन्हीं में चैन से सोते हैं.