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Showing posts from October 30, 2020

कुछ मन का ना मिला

 ऐसे ही बीती जा रही जिंदगी मेरी 'पर 'लगा कर,                  बहुत कुछ मिला फिर भी मेरे मन का ना मिला.                 दुख बहुत मिले इस जिंदगी में कोई सुख ना मिला,                 जो भी मिला मुझे कुछ भी मन का ना मिला.  दिल मिला, दिल वाले मिले ,पति मिला घर वाले मिले,           रिश्तेदार मिले बहुत   और नातेदार भी मिले बहुत सारे.     पड़ोसियों का लगा रहा हरदम  आना जाना घर मेरे ,          जो भी मिला मुझे संतोष किया कुछ भी मन का ना मिला. गरीबी तो मिली थी मुझे बचपन से एक करीबी सखा बनके,   होता रहा गुजारा खाते पीते रहे सुकून से घर के सभी.           जिंदगी जीते -जीते धीरे -धीरे हम इस उम्र के हो आए अब, सुकून आए जिंदगी में मेरी ऐसा कोई सहारा ना मिला     .