ए जिंदगी !
ए जिंदगी! जिए जा रही हूं तुझे मैं आहिस्ता आहिस्ता. कभी तो मंजिल मिलेगी मुझे भी आहिस्ता आहिस्ता. मैं जानती हूं सरल नहीं है जीना तुझे ऐ जिंदगी ! फिर भी मंजिल को पा जाऊंगी अपनी आहिस्ता आहिस्ता
A natural feeling of writing poetry it can heal ure heart