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Showing posts from October 18, 2020

ए जिंदगी !

  ए जिंदगी! जिए जा  रही हूं तुझे मैं आहिस्ता आहिस्ता.      कभी तो मंजिल मिलेगी मुझे भी आहिस्ता आहिस्ता.            मैं जानती हूं सरल नहीं है जीना तुझे ऐ जिंदगी !               फिर भी मंजिल को पा जाऊंगी  अपनी आहिस्ता आहिस्ता

दिल उदास है मेरा

 दिल उदास है मेरा और आंखें बेचैन है मेरी.                     . दिल धड़क रहा है ताल दे दे कर नाच रहा.                          तुम आओगे कि, नहीं आ पाओगे मुझ तक,                       बीच भंवर में डोले डगमग नैया मेरी.

बुझी बुझी पलकों से

 बुझी बुझी  पलकों से, इंतजार तेरा हमेशा रहता  है मुझको,  जाने कौन गली से तू आ जाए , पलक बिछाए बैठी रहती हूं. एक घड़ी को जो उठी यहां से, तेरा आना जाना ना हो जाए,  इस गली में है प्राण बसे ,इंतजार तेरा हमेशा रहता है मुझको. 
 जमाने की भरी भीड़ में हम विश्वास किसका करें यारों,         जहां जहां कदम पड़ते हैं मेरे, वही वही धोखा है यारों.          यहां कोई अपना नहीं है सभी के सभी पराए हैं यारों ,           हर कोई इसी फिराक में है ,कब दिखे? इसे लूट लो यारों.

हम दीवाने हो जाएं

  बोल ऐसे हो की कानों में एक अद्भुत  सी शांति छा जाए.     हंसना ऐसा हो किसी का कि जैसे फूल झड़ रहे हो वहां. उसका व्यक्तित्व ऐसा हो  के हम ठगे से रह जाएं वही.          प्यार ऐसा हो उसकी आंखों में कि हम दीवाने हो जाए.

उसका हंसना

  गजब की उसकी हंसी लगता था जैसे फूल झड़ रहे हैं.        गजब था उसका खिलखिलाना जैसे पक्षी हंस रहे हैं    .         गजब खूबसूरत था उसका चेहरा जैसे देवी  सामने खड़ी हैं.  गजब था उसका बोलना जैसे कोई शहनाई बज रही हैं.