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Showing posts from October 26, 2020

चोट चोट दिल पर लगती है

 चोट जो दूसरे दे तो मत गम करना दोस्तों,                         उसे तो हम भूल ही जाएंगे कभी ना कभी.                          चोट तो अपनों की  दी हुई होती है जो सीधे,                      मन से उतर कर दिल में  दर्द भर जाती  है                        
  गैरों की क्या बात करें गैर तो गैर ही  होते हैं.                     मुझे तो इस दुनिया में अपनों ने ही लूटा है सदा.                  कश्ती मझधार में डूबी डूब गई तो क्या हुआ ?                   मुझे तो मेरे अपने माझी नहीं मझधार में धकेला है.

हम जिंदगी की दौड़ में पीछे है

 हम जिंदगी की दौड़ में पीछे हैं बहुत , क्योंकि हमने,               सभी को साथ लेकर मंजिल पाने की भूल की थी.              हम जिंदगी की दौड़ में पीछे हैं बहुत ,क्योंकि हमने              दूसरों को ही अपनी मंजिल  बनाकर रख लिया था.