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Showing posts from October 28, 2020
 क्या करूं मैं उसकी बेवफाई का कि, भुलाए नहीं भूल पाते कभी था उसका हाथ मेरे हाथों में ,घूमा करते थे बगीचों में .  जाने कौन सी बात उसकी मेरे दिल पर लगी टूटा दिल      ,     अब सब कुछ सिमट गया उसकी यादों में मेरी यादों में.

उसकी आंखें

 उसकी आंख है ,आंखें हैं कि, समुंदर है कि, गहरा दरिया,         हम ऐसे डूबे उनमें, गहराई इतनी कि डूबते चले गए हम.         रात और दिन सुबह हो या शाम डूबे ही रहते हैं इनमें ,  लाख कोशिश की सभी ने फिर ना निकल पाए इनसे हम.