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Showing posts from October 31, 2020

बदहवास थी वह

   बदहवास थी वह आंखें थी उसकी डरी डरी ,                अपलक देख रही थी मेरी ओर कुछ सहमी सी.            हाथों को थाम कर मैंने उसे धीरज देते हुए कहा!            मां समझ मुझे यमराज से लड़ जाऊंगी ना घबरा.

हिमालय की तरह अटल

 जमाने की रुसवाईयों को मैंने दिल से हटा रखा है,               हर पल मैंने एक  उम्मीद का दीपक जला रखा है .             लाख सितम करे जमाना हम पर यह बेदर्दी हमेशा,              अपने को हमने हिमालय की तरह अटल बना रखा है.