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Showing posts from October 12, 2020

मैं जानती हूं.

 मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी.            मैं जानती हूं कंकड़ हैं पत्थर हैं कांटे हैं नदी और नाले हैं,      मैं जानती हूं दूर मुझे है जाना बेशुमार हैं  अड़चनें भरी. मैं      मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी.  मैं बैठी हूं किसी की बेटा नहीं हूं मैं नजरें सभी की गंदी है,    रुकना नहीं है मुझे इन सभी का सामना करते हुए बढ़ना है    जो रुक जाते हैं वह, कैसे राहगीर  ?  नहीं कुछ डर मुझे        मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी .             जहां मैं जाती हूं सब घूरते रहते हैं मुझे ,भूखे शेर की तरह.    सुरक्षित नहीं हूं कहीं पर भी मैं खतरा है पल पल पर मुझे. फिर भी मैं   आगे  बढ़ती चलूंगी कहीं नहीं रखूंगी मैं कभी,    मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी.             मुझ में भी जान है मैं हूं बेटी किसी की मेरे...