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Showing posts from October 20, 2020

व्यवहार

 हम व्यवहार लेकर फिरते रहे दरबदर अपने हाथों में,            लोग आए हमारे व्यवहार को बिजनेस बना कर चले गए.

उसकी गरीबी

  वह झाड़ियों से निकलती है. कराहती हुई अपने बदन को साफ  करती हैं .सिर पर पत्तों का ढेर लगा हुआ है और एक असहनीय पीड़ा के साथ चलते हुए धीरे-धीरे अपने घर को पहुंचती हैं. जब उसकी मां ने इकलौती बेटी की यह हालत देखती है तो पूछती है क्या हुआ बेटा ?कहीं गिर गई थी क्या? अपने आंसुओं को छुपाती हूं बनावटी मुस्कान के साथ कहती है हां मां रस्ते में एक गाय के धक्के से में गिर गई. मां तत्काल उसके कपड़े साफ करने लगे और सिर पर लगे हुए पत्तों को साफ करने   लगी तभी उसकी नजर बेटी के गले  पर पड़ती है. बेटी के गले में एक ताजा अभी कुछ देर पहले लगा हुआ नाखूनों का निशांत  था. कुछ पल तो है अनजान बन गई लेकिन उसका ह्रदय हलक में आकर फस गया और कह ही बैठी बेटा! यह क्या हुआ तुझको? यह किस चीज का निशान है. बेटी ने घबराकर अपने निशान को छुपाते हुए कहा कुछ नहीं मां ऐसे ही. कहकर उसने अपने आंसुओं को छुपाने की भरसक कोशिश की लेकिन असफल रही. अब तक मां की हिचकी बंध चुकी थी    दोनों मां बेटी एक दूसरे से लिपट कर लगातार घंटों रोती नहीं जब मन हल्का शांत हुआ तो मां ने धीरे से कहा की क्या उसने फिर...

जब दिन ढल जाता है

  जब दिन ढल जाता है याद सताने लगती है तेरी.               तेरा आना मुझसे मिलना बातें ढेरों करना मुझसे.                 मुरझाए जिंदगी फिर हरी हो जाती है मेरी,                        मीठी-मीठी बातों के यादों के साए में फिर आकर.