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Showing posts from November 17, 2020

नकली साधु

  ले कमंडल हाथ में, साधु का रूप धारण किया है हमने,        जा बैठे हम आज, दलालों की बस्ती में, कुछ इस तरह,           कोई तो यहां आएगा, अपनी जन्म कुंडली जानने ,             बन बगुला नदी का,धर दबोचे गे उसे मछली की तरह.