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Showing posts from October 27, 2020

रात के अंधेरे में

 रात के अंधेरे में मेरा मन निकलता है,                                दूर घनी बस्ती में अपनी हस्ती को तलाश करने.               रात के अंधेरे में मेरा मन नहीं करता है,                            अनसुलझी पहेली के ,जवाब ढूंढने नित्य निकलता है.

जिंदगी को हम सीधा सरल समझ बैठे थे

 जिंदगी को हम सीधा और सरल समझ बैठे थे.                  जब जीने लगे तो इसका रास्ता समझ में आया.                    कई बार गिरे फिर गिरे और  संभले हम  बार-बार ,              जब जीना इसे सीख गए तब इस पर ऐतबार आया.