Posts

चोट चोट दिल पर लगती है

 चोट जो दूसरे दे तो मत गम करना दोस्तों,                         उसे तो हम भूल ही जाएंगे कभी ना कभी.                          चोट तो अपनों की  दी हुई होती है जो सीधे,                      मन से उतर कर दिल में  दर्द भर जाती  है                        
  गैरों की क्या बात करें गैर तो गैर ही  होते हैं.                     मुझे तो इस दुनिया में अपनों ने ही लूटा है सदा.                  कश्ती मझधार में डूबी डूब गई तो क्या हुआ ?                   मुझे तो मेरे अपने माझी नहीं मझधार में धकेला है.

हम जिंदगी की दौड़ में पीछे है

 हम जिंदगी की दौड़ में पीछे हैं बहुत , क्योंकि हमने,               सभी को साथ लेकर मंजिल पाने की भूल की थी.              हम जिंदगी की दौड़ में पीछे हैं बहुत ,क्योंकि हमने              दूसरों को ही अपनी मंजिल  बनाकर रख लिया था.

सफर चल रहा है कि .....

 सफर चल रहा है कि यूं ही निकल रहा है,                          उम्मीद का दामन   जैसे फिसल रहा है                             हार गई हूं जैसे अब चलते चलते मैं तो,                             सामने अब मौसम पतझड़ का आ गया है.

जिंदगी मेहरबान नहीं रही मुझ पर. जिंदगी मेहरबान नहीं रही मुझ पर

  जिंदगी मेहरबान नहीं रही मुझ पर,                                 कदम कदम पर बहुत ठोकरें खाई हैं.                                सभी को मिला है जो जिसने चाहा.                                 मुझे तो केवल रुसवाईयां मिली है.

तंग करता रहा

वह अपने आप को छुपाने के लिए हमेशा मुझ पर वह           शिकवे शिकायत करता रहा ,मैं  जान ना लूं उसको.            मैं रोती रही हमेशा अपने घर में कैद होकर अकेली               वह गली-गली रंगरेलियां मनाता  रहा .

दिल के रिश्ते नाजुक होते हैं

 दिल के रिश्ते बड़े नाजुक होते हैं,                                    तोड़ने के लिए हथौड़े की जरूरत नहीं पड़ती साहब,             बस एक बार दिल तोड़ दो जोर से,                                   दो हल्का सा झटका और यह रिश्ता टूटा.