क्या करूं मैं उसकी बेवफाई का कि, भुलाए नहीं भूल पाते कभी था उसका हाथ मेरे हाथों में ,घूमा करते थे बगीचों में .  जाने कौन सी बात उसकी मेरे दिल पर लगी टूटा दिल      ,     अब सब कुछ सिमट गया उसकी यादों में मेरी यादों में.

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  1. वक्त कभी एक सा नहीं रहता .वह हमेशा बदलता रहता है .मेरा भी बदल गया.

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