बुझी बुझी पलकों से

 बुझी बुझी  पलकों से, इंतजार तेरा हमेशा रहता  है मुझको,  जाने कौन गली से तू आ जाए , पलक बिछाए बैठी रहती हूं. एक घड़ी को जो उठी यहां से, तेरा आना जाना ना हो जाए,  इस गली में है प्राण बसे ,इंतजार तेरा हमेशा रहता है मुझको. 

Comments

  1. इंतजार की कोई सीमा नहीं होती. वह हमेशा होता है .वह हमेशा बना रहता है .चाहत है तो इंतजार भी है

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