नई रोशनी होने लगी है
दिए जल रहे है दिवाली के ,
बुझे नैना राह देखते पिया जी की.
देश की रखवाली करने कह कर गए थे,
दिवाली पर मैं आ ही जाऊंगा.
एक दीवाली निकल गई है,
अबकी दिवाली आ ही जाऊंगा.
जलते दिए बुझने लगे हैं,
कब तक कोई खबर ना आई है.
जलते दिए अब बुझ गए हैं,
दिल बिरहन का जलने लगा है.
सरिता वन आंखों से अब,
सजल नीर धार वन बहने लगी है.
अपनी साड़ी का पल्लू ले आंखों में,
गालों को वह रगड़ने लगी है .
सहसा !दी दस्तक दरवाजे में किसी ने,
वह दरवाजे पर दौड़ पड़ी है .
सामने जब सैनिक को देखा,
जोर-जोर से वह रोने लगी है.
नदी और सागर दोनों मिल गए,
नई दिवाली ,नई रोशनी होने लगी है.
दिवाली जैसे बड़े त्यौहार में ,जब अपना साथ ना हो तो ऐसे में ,कोई आनंद नहीं आता. मन बुझा बुझा कर लगता है.
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