काश !तुम सागर होते मैं होती एक नदी तड़पती. काश !तुम गागर होते मैं उस में रहती शीतल जल सी . काश !तुम एक वृक्ष होते मैं रहती फलसी लटकती. काश तुम कान्हा होते मैं राधा बनकर मधुबन में रहती.
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मैं जानती हूं.
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मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी. मैं जानती हूं कंकड़ हैं पत्थर हैं कांटे हैं नदी और नाले हैं, मैं जानती हूं दूर मुझे है जाना बेशुमार हैं अड़चनें भरी. मैं मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी. मैं बैठी हूं किसी की बेटा नहीं हूं मैं नजरें सभी की गंदी है, रुकना नहीं है मुझे इन सभी का सामना करते हुए बढ़ना है जो रुक जाते हैं वह, कैसे राहगीर ? नहीं कुछ डर मुझे मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी . जहां मैं जाती हूं सब घूरते रहते हैं मुझे ,भूखे शेर की तरह. सुरक्षित नहीं हूं कहीं पर भी मैं खतरा है पल पल पर मुझे. फिर भी मैं आगे बढ़ती चलूंगी कहीं नहीं रखूंगी मैं कभी, मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी. मुझ में भी जान है मैं हूं बेटी किसी की मेरे...
इंतजार करो.
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तुम देर से आए तो तुमने कहा इंतजार करना था तुम्हें, हम देर से आए तो तुम नाराज होकर हम से चल दिए. तुम जो रूठ है हमसे तो हमने मनाया तुम्हें हर पल. हम जो रूठ गए तुमसे तुम ठुकरा कर हमें चल दिए. अपने प्यार को तुमने हमसे सच्चा प्यार कहा हमेशा, हमारे प्यार को जो हमारी जान था मजाक बना दिया तुमने. मैं ना जी सकूंगा तुम बिन तुम यही कहा करते थे मुझसे, तो जिए जा रहे हो ठुकरा कर मुझे ,मैं कैसे जियूं तुम बिन ? सब कोरी बातें थी तुम्हारी और झूठी कसमें खाई थी तुमने, हमारी जिंदगी को सूना करके कितना खुश रहते हो तुम. तुम्हारी हर बात को सीने से लगा कर बैठी हूं अब भी , तुम तो मेरी हर बात को यूं ही हंसी उड़ा कर चल दिए. देखना एक दिन वह आएगा जब तुम्हें मे...