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अभिशाप

  यह हमारे लिए या यूं कहूं कि ,हमारे भारत देश के लिए यह एक अभिशाप का विषय है कि हमारा देश निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर  है. किंतु इस देश मे हमारी बेटियां दिनोंदिन अपना मान सम्मान तो खो ही रही है. हैं साथ ही साथ अपने जीवन से भी हाथ धो रही हैं. हमारे देश में स्त्रियों के मान सम्मान और उन्हें आगे बढ़ने के लिए विविध प्रकार की योजनाएं हमारी सरकार बना रही है, उनके उत्कर्ष के लिए ,उनके भविष्य के लिए  आए दिन कई प्रकार की सरकारी योजनाएं और नीतियां बनाई जा रही है.                                            जहां हम अपनी बेटियों के लिए विविध प्रकार की सरकारी योजनाएं लेकर आ रहे हैं और उन्हें उन्नति शील बनाने की और उन्हें आगे बढ़ने की विविध प्रकार की सरकारी छूट दी जा रही हैं वहीं दूसरी ओर निरंतर कुछ मानसिक रूप से गिरे हुए लोग हमारी बेटियों की अस्मत से खेल रहे हैं उनकी अस्मत को तार-तार कर ही रहे हैं साथ ही साथ उन्हें दरिंदगी के साथ फोन के विभिन्न अंगों को नोच और काट के विविध प्रका...
  काश !तुम सागर होते मैं होती एक नदी तड़पती.                 काश !तुम गागर होते मैं उस में रहती  शीतल जल सी .           काश !तुम एक वृक्ष होते मैं रहती फलसी लटकती.       काश तुम  कान्हा होते मैं राधा  बनकर मधुबन में रहती.

तुम गीत बन जाओ

  तुम गीत बन जाओ मैं बन जाऊं गजल तुम्हारी.                 तुम प्रेमी बन जाओ मैं बन जाऊं प्रेमिका तुम्हारी.                तुम भाव बन जाओ मेरा मैं बन जाऊं भावना तुम्हारी.          तुम जीवन बन जाओ मेरा मैं बन जाऊं जीवनी तुम्हारी.

मुझे नहीं चाहिए

 मुझे नहीं चाहिए कीमती रेशम की साड़ियां,                        मुझे नहीं चाहिए सोने के महंगे - महंगे कंगन.                     मुझे तो चाहिए तेरा केवल समर्पित प्यार,                          जिस से महकता रहे सदा -सदा मेरा आंगन

संदेह सा होने लगा है.

  दलाल भरे पड़े हैं सीधे-साधे की बस्ती में,                        हम डूबने से लगे हैं आपने ही बनाई कश्ती में.                    जगह-जगह चोर है और लूटने वाले हमें,                           अब संदेशा होने लगा है अपनी बनाई हस्ती में.

मैं जानती हूं.

 मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी.            मैं जानती हूं कंकड़ हैं पत्थर हैं कांटे हैं नदी और नाले हैं,      मैं जानती हूं दूर मुझे है जाना बेशुमार हैं  अड़चनें भरी. मैं      मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी.  मैं बैठी हूं किसी की बेटा नहीं हूं मैं नजरें सभी की गंदी है,    रुकना नहीं है मुझे इन सभी का सामना करते हुए बढ़ना है    जो रुक जाते हैं वह, कैसे राहगीर  ?  नहीं कुछ डर मुझे        मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी .             जहां मैं जाती हूं सब घूरते रहते हैं मुझे ,भूखे शेर की तरह.    सुरक्षित नहीं हूं कहीं पर भी मैं खतरा है पल पल पर मुझे. फिर भी मैं   आगे  बढ़ती चलूंगी कहीं नहीं रखूंगी मैं कभी,    मैं जानती हूं डगर कठिन है बहुत दूर है मंजिल मेरी.             मुझ में भी जान है मैं हूं बेटी किसी की मेरे...

इंतजार करो.

 तुम देर से आए तो तुमने कहा इंतजार करना था तुम्हें,            हम देर से आए तो तुम नाराज होकर हम से चल दिए.         तुम जो रूठ है हमसे तो हमने मनाया तुम्हें हर पल.              हम जो रूठ गए तुमसे तुम ठुकरा कर हमें चल दिए.          अपने प्यार को तुमने हमसे सच्चा प्यार कहा हमेशा,             हमारे प्यार को जो हमारी जान था मजाक बना दिया तुमने.  मैं ना जी सकूंगा तुम बिन तुम यही कहा करते थे मुझसे, तो जिए जा रहे हो ठुकरा कर मुझे ,मैं कैसे जियूं तुम बिन   ?     सब कोरी बातें थी तुम्हारी और झूठी कसमें खाई थी तुमने,   हमारी  जिंदगी को सूना करके   कितना खुश रहते हो तुम.    तुम्हारी हर बात को सीने से लगा कर बैठी हूं  अब भी ,         तुम तो मेरी हर बात को यूं ही हंसी उड़ा कर चल दिए.        देखना एक दिन वह आएगा जब तुम्हें मे...