सहारा ढूंढ ही लेंगे
मंजिल दूर है तो क्या हुआ ? हम जिद्दी हैं, किनारा ढूंढ ही लेंगे. हम अकेले हैं अभी तो क्या हुआ ? हम अपना सहारा ढूंढ ही लेंगे. हमें मंजिल तब तक नहीं मिलती, जब तक हमारी कोशिश में दम नहीं होती. हमें सहारा तब तक नहीं मिलता, जब तक हम खुद सहारा बन नहीं जाते. जिंदगी जीने का तरीका सभी को पता है, लोग चलते नहीं है सही राह पर . कुछ सहारा बन जाते हैं किसी का, कुछ सहारा ढूंढ लेते हैं.