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धनतेरस

  आज त्रयोदशी है भगवान महादेव का पापनाशिनी  व्रत. .कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन जब देवता और राक्षसों के द्वारा समुंद्र मंथन किया गया था तो, इस दिन भगवान धनवंतरी जो आयुर्वेद के ज्ञाता थे और है अमृत कलश लेकर उपस्थित हुए थे . उस दिन की याद में हम धनतेरस  का उत्तम पर्व हम सभी भारतवासी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं..  इस दिन सुबह स्नान करके भगवान महादेव के साथ-साथ आयुर्वेद के ज्ञाता धनवंतरी जी की भी विशेष रुप से पूजा और आराधना की जाती है. इस दिन सभी घरों में कोई भी नया सामान यथा:- सोना चांदी, पीतल तांबा या अपनी श्रद्धा के हिसाब से जिसके पास जो धन रहता है उससे और भी ठोस धन यह जरूरत के हिसाब से सामान खरीदा जाता है. इस दिन व्यापारियों की चांदी ही चांदी रहती है. बाजारों में सोना चांदी ;पीतल तांबा ,इच्छा के अनुसार वस्तु खरीदने हेतु लोग भीड़ की भीड़ में ,दुकानों के आसपास और दुकानों के अंदर जय मां रहते हैं. शाम के समय नहा धोकर आयुर्वेद के ज्ञाता भगवान धन्वंतरी जी की पूजा की जाती है. यह पूजा पूरे विधि विधान के अनुसार होती है. भगवान धनवंतरी जी को घर से बने और बाजार से खरीदे ह...

सुख और दुख

  कहते हैं कि मरने पर इंसान ,अच्छे कर्मों के करने कारण स्वर्ग में जाता है और बुरे कर्मों के करने कारण ,वह नरक में जाता है.                         मेरा मानना है स्वर्ग नरक कहीं बाहर नहीं है .इसी जन्म में इसी भूमि पर इंसान अपने कर्मों के आधार पर सुख और दुख दोनों को प्राप्त कर लेता है. यदि कोई बहुत ज्यादा वैभव पूर्ण जीवन जी रहा है उसके जीवन में संपूर्ण सुखों की प्राप्ति है तो आप मान कर चलिए कि वह ,वर्तमान में स्वर्ग का जीवन जी रहा है ,वही उसके लिए स्वर्ग है इसके विपरीत यदि कोई ,जरूरत से ज्यादा दुखी है, छोटी छोटी चीजों के लिए तरस रहा है तो ,मैं यही मानकर चलूंगी की वास्तविक नरक वही व्यक्ति भोग रहा है, जिसे छोटी-छोटी दैनिक जीवन की चीजों के लिए भी दूसरों के सामने अपने दोनों हाथों को  फैलाना पड़ रहा है.                  स्वर्ग और नरक हम में से किसी ने अपनी आंखों से नहीं देखा है. यह सब तो हम आपने धार्मिक पुस्तकों के अध्ययन से ज्ञात कर पाते हैं. यदि वास्तविक स्थिति में देखा जाए...

रुसवाईयां

  ऐसे ही नहीं हम आगे बढ़े अपनी जिंदगी में,                      जमाने की हमने बहुत चोटें खाई है .                                   है सभी के पास अपनी अपनी मंजिल ,                         हमारे पास तो बस रुसवाईयां यह रुसवाईयां है.
  दौर कैसा भी हो मुस्कुराकर चलिए .                                करीब कितने भी रहा हद बना कर चलिए.                        जिंदगी की दौड़ में , कशमकश बहुत है .                            इस जिंदगी की दौड़ में अपनों को साथ लेकर चलिए.
 जिसकी सांसो से मेरी सांसे जुड़ी थी .                              जो हर पल मेरे साथ में खड़ी थी.                                     दुखी रह कर भी मुझे देख खुश हुआ करती थी.                 अपने से ज्यादा प्यार करने वाली,                                    वह एक अकेली दुनिया में मेरी मां हुआ करती थी.

" दुआ" काफी है

नहीं चाहिए कोई दियासलाई ना ही आग का कोई तिनका,      घर जलाने के लिए तड़पते दिल की "बद्दुआ काफी है.          खुशियों का खजाना पाने के लिए ना हो कोई खजाना ,          इसके लिए तो एक दुखी दिल की "दुआ" काफी है
बहुत खोजा मैंने तुझ में ,प्यार की सच्चाई को,                    बहुत खोजा मैंने तुझ में, प्यार की अच्छाई को.                   कहीं ना मिली मुझे, प्यार की गिरती हुई बरखा                   मेरे लिए तेरे दिल  मैं सदा, दरवाजे बंद ही देखें .