धनतेरस
आज त्रयोदशी है भगवान महादेव का पापनाशिनी व्रत. .कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन जब देवता और राक्षसों के द्वारा समुंद्र मंथन किया गया था तो, इस दिन भगवान धनवंतरी जो आयुर्वेद के ज्ञाता थे और है अमृत कलश लेकर उपस्थित हुए थे . उस दिन की याद में हम धनतेरस का उत्तम पर्व हम सभी भारतवासी बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं.. इस दिन सुबह स्नान करके भगवान महादेव के साथ-साथ आयुर्वेद के ज्ञाता धनवंतरी जी की भी विशेष रुप से पूजा और आराधना की जाती है. इस दिन सभी घरों में कोई भी नया सामान यथा:- सोना चांदी, पीतल तांबा या अपनी श्रद्धा के हिसाब से जिसके पास जो धन रहता है उससे और भी ठोस धन यह जरूरत के हिसाब से सामान खरीदा जाता है. इस दिन व्यापारियों की चांदी ही चांदी रहती है. बाजारों में सोना चांदी ;पीतल तांबा ,इच्छा के अनुसार वस्तु खरीदने हेतु लोग भीड़ की भीड़ में ,दुकानों के आसपास और दुकानों के अंदर जय मां रहते हैं. शाम के समय नहा धोकर आयुर्वेद के ज्ञाता भगवान धन्वंतरी जी की पूजा की जाती है. यह पूजा पूरे विधि विधान के अनुसार होती है. भगवान धनवंतरी जी को घर से बने और बाजार से खरीदे ह...